देश के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड के बीच अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले 24 से 72 घंटों के लिए भारी बारिश, तेज हवाओं और मोंथा तूफान के प्रभाव को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ों तक और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में भी प्रकृति का कड़ा रुख देखने को मिल सकता है। एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण मौसम में यह बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में 27 और 28 जनवरी को भारी बर्फबारी की प्रबल संभावना है। इस दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में 50 से 70 किमी/घंटा की रफ्तार से बर्फीली हवाएं चल सकती हैं, जिससे सामान्य जनजीवन और यातायात बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। इसके साथ ही उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि (Hailstorm) का अलर्ट जारी किया गया है। पहाड़ों पर हो रहे इस कड़े मौसमी बदलाव का सीधा असर मैदानी इलाकों के तापमान पर पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में ठिठुरन और भी ज्यादा बढ़ सकती है।
मैदानी राज्यों में भी मौसम का व्यापक असर देखने को मिलेगा। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। राजस्थान के कुछ संभागों में ओलावृष्टि की भी चेतावनी दी गई है, जो इस समय खेतों में खड़ी फसलों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में भी घने बादलों की आवाजाही के साथ हल्की बूंदाबांदी हो सकती है, जिससे दिन के तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की जाएगी।
राजधानी दिल्ली में बारिश की संभावना के साथ-साथ ठंड का प्रकोप निरंतर जारी रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने का अनुमान है। सुबह के समय दिल्ली-एनसीआर में घना कोहरा छाए रहने के कारण सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित हो सकता है। पालम और सफदरजंग मौसम केंद्रों ने दृश्यता (Visibility) कम रहने की चेतावनी जारी की है, इसलिए वाहन चालकों को सड़क पर सफर के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
उत्तर भारत के साथ-साथ दक्षिण भारत के राज्यों में भी मौसमी गतिविधियां बेहद सक्रिय नजर आ रही हैं। मोंथा तूफान के प्रभाव के कारण तमिलनाडु के नौ जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव के क्षेत्र की वजह से तटीय इलाकों में तेज लहरें और हवाएं चल सकती हैं। मौसम केंद्र ने मछुआरों को फिलहाल समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी है और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने को कहा गया है।
बारिश और ओलावृष्टि का यह दौर कृषि क्षेत्र के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। विशेष रूप से गेहूं, सरसों और चने की फसलों को ओलावृष्टि से नुकसान पहुंचने की प्रबल आशंका है। मौसम विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि 29 जनवरी से तापमान में एक बार फिर बड़ी गिरावट आएगी, जिससे पाला पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। किसान भाइयों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए खेतों में जल निकासी का उचित प्रबंध रखें और मौसम साफ होने तक किसी भी प्रकार के कीटनाशकों का छिड़काव रोक दें।
यह विस्तृत मौसम अपडेट वर्तमान सैटेलाइट डेटा और IMD के नवीनतम बुलेटिन पर आधारित है। मौसम की तात्कालिक स्थिति में किसी भी समय बदलाव संभव है, इसलिए स्थानीय समाचारों और क्षेत्रीय मौसम केंद्रों द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले निर्देशों का गंभीरता से पालन करें।