उत्तर भारत के मौसम ने एक बार फिर अचानक करवट ली है। पिछले तीन दिनों की खिली हुई धूप के बाद अब पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से आसमान में बादलों ने डेरा डाल लिया है। मौसम विभाग ने 27 और 28 जनवरी को उत्तर भारत के कई राज्यों में भारी बारिश और ओलावृष्टि की गंभीर चेतावनी जारी की है। पाकिस्तान और पंजाब के रास्ते आने वाले ये बादल अब हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस मौसमी बदलाव का सबसे अधिक प्रभाव हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में देखने को मिलेगा। इन क्षेत्रों में न केवल बूंदाबांदी होगी, बल्कि तेज हवाओं के साथ जोरदार बौछारें पड़ने की भी संभावना है। 26 जनवरी की दोपहर से शुरू हुआ यह बदलाव आगामी 48 घंटों तक जारी रहेगा, जिससे ठिठुरन और गलन में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
यह समय रबी की फसलों के लिए अत्यंत संवेदनशील है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे अगले दो दिनों तक अपनी फसलों में किसी भी प्रकार का कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव (Spray) न करें। यदि बादल छाए हुए हैं या बारिश की संभावना है, तो स्प्रे करने से दवा धुल सकती है, जिससे मेहनत और पैसा दोनों बर्बाद होने का खतरा रहता है। 29 जनवरी से मौसम के फिर से साफ होने की उम्मीद है, जिसके बाद ही खेती से जुड़े छिड़काव के कार्य किए जाने चाहिए।
मौसम की इस उथल-पुथल के बीच ‘मानसून 2026’ को लेकर भी चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं। मौसम विज्ञानियों ने 2026 के मानसून पर अल-नीनो (El Nino) के प्रभाव की आशंका जताई है। यदि अल-नीनो का असर गहराता है, तो देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है, जिससे सूखे जैसे हालात पैदा होने का खतरा मंडरा रहा है। मानसून के दौरान बारिश की अनिश्चितता खेती और जल भंडारण के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलों में इस समय सही प्रबंधन की आवश्यकता होती है। फसल की अनियंत्रित बढ़त को रोकने के लिए पीजीआर (PGR) के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है, लेकिन इसके लिए भी शुष्क मौसम का होना अनिवार्य है। अचानक गिरते तापमान और बारिश के कारण फसलों में नमी बढ़ सकती है, इसलिए जल निकासी का उचित प्रबंध रखना जरूरी है। इस मौसम अपडेट को अन्य किसान भाइयों तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है ताकि वे समय रहते अपनी उपज को सुरक्षित कर सकें।
यह मौसम पूर्वानुमान वर्तमान सैटेलाइट तस्वीरों और आईएमडी (IMD) के आंकड़ों पर आधारित है। आगामी 29 और 30 जनवरी को मौसम के दोबारा खुलने के बाद ही धूप निकलने की संभावना है। तब तक ठंड से बचाव के उचित उपाय करें और मौसम की पल-पल की जानकारी के लिए स्थानीय मौसम केंद्र के संपर्क में रहें।