देश के कई हिस्सों में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। वर्तमान में राजस्थान के ऊपर चक्रवाती हवाओं का एक क्षेत्र विकसित हुआ है, जिसके कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी आ रही है। इसका व्यापक असर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के राज्यों पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है, जहाँ कई स्थानों पर बारिश और ओलावृष्टि की गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं।
28 जनवरी को यह मौसमी तंत्र धीरे-धीरे पूर्व की ओर बढ़ेगा। इसके प्रभाव से उत्तर प्रदेश के अवध और पूर्वांचल के इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की प्रबल संभावना है। बिहार के वे जिले जो उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे हैं, वहाँ भी सुबह से दोपहर के बीच बारिश के आसार बने हुए हैं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के उत्तर-पूर्वी हिस्सों जैसे रीवा, सीधी और सिंगरौली में भी हल्की वर्षा हो सकती है। महाराष्ट्र के विदर्भ और मध्य प्रदेश के मध्यवर्ती इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 29 और 30 जनवरी को यह सिस्टम आगे निकल जाएगा, जिससे अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ और शुष्क होने लगेगा। हालांकि, सिस्टम के गुजरते ही कड़ाके की ठंड एक बार फिर जोर पकड़ेगी। पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में शीतलहर (Cold Wave) चलने की संभावना है। इसके साथ ही राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में सुबह के समय घना कोहरा छाने का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे विजिबिलिटी काफी कम रह सकती है।
एक तरफ जहाँ मौसम में उथल-पुथल जारी है, वहीं आर्थिक मोर्चे पर भी बड़ी खबर सामने आ रही है। सराफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमत ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गई है। वैश्विक बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और भारी मांग के कारण सोने-चांदी के दामों में यह ऐतिहासिक उछाल देखा जा रहा है, जिससे निवेशकों और आम ग्राहकों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
पहाड़ों पर भारी बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश के बाद तापमान में भारी गिरावट तय है। 30 जनवरी तक शेष भारत में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा, लेकिन कड़ाके की सर्दी और पाला फसलों के लिए मुश्किल बढ़ा सकता है। किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी फसलों को पाले और कोहरे से बचाने के लिए सिंचाई का उचित प्रबंध रखें। कोहरा छंटने के बाद ही कृषि संबंधी अन्य छिड़काव के कार्य करें ताकि किसी भी प्रकार के आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।
यह मौसम अपडेट वर्तमान उपग्रह चित्रों और आईएमडी (IMD) के पूर्वानुमान पर आधारित है। मौसम की तात्कालिक स्थिति और कोहरे के घनत्व के अनुसार ही अपनी यात्रा और कृषि कार्यों की योजना बनाएं।